श्री सप्त श्लोकी दुर्गा
- Girish Joshi
- Sep 27, 2025
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"श्री सप्तश्लोकी दुर्गा" संस्कृत स्तोत्र है, जिसमें माँ दुर्गा के सात श्लोक हैं ।
यह "दुर्गा सप्तशती" का सार है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से माँ दुर्गा सभी प्रकार के भय, दुःख और दरिद्रता से रक्षा करती हैं और शुभ फल प्रदान करती हैं।
नवरात्रि में इस स्तोत्र का पाठ करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है ।
आजकल नवरात्रि चल रही हैं, अतः आपके लिए यह स्तोत्र यहाँ नीचे दिया जा रहा है ।
यहाँ नीचे "सप्तश्लोकी दुर्गा" पाठ संस्कृत में (हिंदी अर्थ के साथ) दिया जा रहा है ।
॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥
शिव उवाच :
देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥
देव्युवाच :
श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥
विनियोग:
ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः अनुष्टप् छन्दः, श्री महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१।।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः, स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या, सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥२।।
सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ॥३।।
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥४।।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते॥५।।
रोगानशोषानपहंसि तुष्टा, रूष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति॥६।।
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम्॥७।।
इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्णा ॥
हिन्दी अर्थ :
वे भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं ।।१।।
माँ दुर्गे ! आप स्मरण करने पर सभी प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरुषों द्वारा चिंतन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं । दरिद्रता, दुःख और भय हरने वाली देवी ! आपके सिवा दूसरी कौन है जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिए सदा ही दयार्द्र रहता हो ।।२।।
नारायणी ! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करनेवाली मंगलमयी हो । कल्याणदायिनी शिवा हो । सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो । तुम्हें नमस्कार है ।।३।।
शरण में आये हुए दीनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहने वाली तथा सबकी पीड़ा दूर करने वाली नारायणी देवी! तुम्हें नमस्कार है ।। ४ ।।
सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से सम्पन्न दिव्ययरूपा दुर्गे देवी ! सब भयों से हमारी रक्षा करो; तुम्हें नमस्कार है ।। ५ ।।
देवी ! तुम प्रसन्न होने पर सब रोगों को नष्ट कर देती हो; और कुपित होने पर मनोवांछित सभी कामनाओं का नाश कर देती हो । जो लोग तुम्हारी शरण में जा चुके हैं, उन पर विपत्ति तो आती ही नहीं । तुम्हारी शरण में गए हुए मनुष्य दूसरों को शरण देने वाले हो जाते हैं ।। ६ ।।
सर्वेश्वरी ! तुम इसी प्रकार तीनों लोकों की समस्त बाधाओं को शांत करो और हमारे शत्रुओं का नाश करती रहो ।। ७ ।।
श्री सप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्ण ।।
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